loading...

Sunday, March 3, 2019

15 साल से सेना के पास था बालाकोट का नक्शा लेकिन पिछली सरकारों ने नही दी हमले की अनुमति, अब जाकर मिला सेना को पराक्रम दिखाने का मौका


भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के रिटायर अधिकारी अमर भूषण के मुताबिक, हमें बहुत पहले से पता था कि बालाकोट में आतंकी कैंप पनप रहे हैं, लेकिन वहां कार्रवाई के लिए सभी सरकार से हरी झंडी नहीं मिली।

बकौल भूषण, इससे पहले जब भी बड़े आतंकी हमले हुए, खुफिया एजेंसियों और सेना ने बालाकोट तथा इसके आसपास के टेरर कैंपों को निशाना बनाने की अनुमति मांगी, लेकिन ऐसा न हो सका। 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक से पहले भी बालाकोट का नाम सामने आया था। हो सकता है तब यह तय हुआ कि पहली बार पीओके में थोड़ा अंदर जाकर सर्जिकल स्ट्राइक की जाए, फिर मौका मिला जो बालाकोट को निशाना बनाएंगे और ऐसा ही हुआ।

पुलवामा आतंकी हमले के बाद की भारतीय वायुसेना की एयर स्टाइक में कितने आतंकी मारे गए, इस सवाल पर भूषण ने कहा, संख्या कोई मायने नहीं रखती है। सबसे बड़ी बात यह है कि हमने जैश के आतंकी कैंपों की पहचान की और उन पर निशाना भी लगाया। यही आतंकी तैयार किए जाते थे। भारत ने पाकिस्तान और दुनिया को सख्त संदेश दिया है। भारत यह संदेश देने में भी कामयाब रहा है कि उसे पता है कि पाकिस्तान के किस कौने में आतंकी छिपे हैं।

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 80 किमी अंदर तक जाकर बालाकोट पर एयर स्ट्राइक की। सेना ने 15 साल पहले ही आतंक की फैक्टरी बन रहे बालाकोट का नक्शा तैयार कर लिया था, लेकिन कभी वहां जाकर सर्जिकल स्ट्राइक करने की अनुमति नहीं मिली। पहली बार आदेश मिला तो भारत के लड़ाकू विमान अंदर तक घुस गए और जैश के सबसे बड़े अड्डे को तबाह कर दिया।
loading...