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Sunday, March 10, 2019

ना वैज्ञानिक ना बिजनेसमैन, शहीदों को 110 करोड़ देने की बात करने वाला मुर्तजा निकला ढोंगी, रवीश ने किया था महिमा मंडित


दरअसल मुर्तज़ा मूल रूप से कोटा से हैं, 2015 में वो मुंबई पहुँचे, बचपन से नेत्रहीन हैं, पहले उनका ऑटोमोबाइल का बिज़नेस था, बाद में वो अन्वेषक बन गए, फ़िलहाल वो 'फ़्यूल बर्न टेक्नोलॉजी' नामक किसी तकनीक पर काम कर रहे हैं और वो 110 करोड़ रुपये दान में देने की पेशकश कर चुके हैं। 

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक मुर्तज़ा अली नामक कोटा निवासी सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। दरअसल जिसने दावा किया था कि वो पुलवामा हमले में वीरगति पाने वाले जवानों के परिवारों के लिए 110 करोड़ रूपये दान करेगा, प्रधानमंत्री राहत कोष में। बात 110 करोड़ के दान की थी, वो भी एक मुस्लिम द्वारा, जोकि खुद नेत्रहीन है। सबको लगा वाह क्या शानदार लिबरल स्टोरी है...। सबसे सोशल मीडिया पर तारीफों के पुल बांध दिये। टीवी-अखबारों में बड़ी-बड़ी हेडलाइन छाप दी गईं। सबने कहा यहीं है कलियुग का असली मसीहा...। लेकिन मुर्तज़ा अली कौन है, क्या वो वाकई कोई बिजनेसमैन है, कहां से आयेंगे। उसके पास इतने पैसे। ये सवाल किसी ने नहीं पूछा..।

मुर्तज़ा अली ने बीबीसी से एक इंटरव्यू में कहा कि, "इस पैसे का सोर्स मुझे लोगों को बताने की क्या ज़रूरत है. मैं स्वेच्छा से अपने पैन कार्ड और अन्य ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ ये पैसा पीएम को देने वाला हूँ."

एनडीटीवी पर रवीश कुमार ने तो मुर्तजा को स्टूडियो बुलाकर प्राइम टाइम शो कर डाला। मन की आंखों से देखकर दुनिया को आईना दिखाने वाले टाइप के कसीदे गढ़ दिये। देखिये वीडियो ।



लेकिन धीरे-धीरे तस्वीर साफ होने लगी है, पता चला कि कथित वैज्ञानिक+बिजनेसमैन दरअसल एक ढोंगी है। न तो उसके पास इसके पास इतना पैसा है, न ही उसने कोई टेक्नोलॉज़ी ईजाद की है। जिसको उसने पीएमओ में भेजने का दावा किया है।  जिसकी रॉयल्टी से आने पैसों को दान का दावा किया जा रहा है। यहां तक कि उसके कोटा के घरवालों को पता नहीं है कि वो इतना बड़ा आदमी है।  कुल मिलाकर सबकुछ फर्जीवाड़ा निकला।

 मुर्तज़ा का फर्ज़ीवाड़ा है पुराना 

खबरों के मुताबिक मुर्तज़ा पर 18.50 लाख का लोन है, जोकि उसने एक व्यापारी से लिया था। जिसको चुकाने के लिए मुर्तजा ने एक चेक दिया था। जो कि बाउंस हो गया। इसके अलावा भी मुर्तज़ा पर साढ़े 5 लाख का लोन का कर्ज बाकी है।  


तीन महीने पहले भी मुर्तजा ने एक स्कूल बनवाने के लिए 1 करोड़ 10 लाख रूपये का चेक दिया था। जोकि बाउंस हो गया।

कुछ महीने पहले मुर्तज़ा ने मुम्बई में गरीबों के लिए घर बनवाने के लिए दो किस्तों में 53 करोड़ और 21 करोड़ रूपये देने की बात कही थी। लेकिन वो पैसे आज तक नहीं दिये।
उधर कोटा में मुर्तज़ा के परिवार वाले भी मुर्तज़ा की सफलता के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि उसने 11 साल पहले कोटा छोड़ दिया था। जिसके बाद वो मुंबई बस गया और फिर कभी नहीं आया। उन्हें भी नहीं मालूम कि मुर्तजा़ के पास इतने पैसे आयेंगे कहां से .!

मुतर्ज़ा का झूठ और बीबीसी का पर्दाफाश 

मुर्तज़ा के सच को जानने के लिए बीबीसी ने एक फैक्ट-चेक स्टोरी की। जिसमें मुर्तज़ा की कहानी फर्जी निकली। पढ़िए बीबीसी की रिपोर्ट- 

मुर्तज़ा बताते हैं कि एक बड़ी कंपनी के साथ मिलकर उन्होंने 'फ़्यूल बर्न टेक्नोलॉजी' तैयार की है. लेकिन ये कंपनी भारतीय है या विदेशी? इसका क्या नाम है? क्या स्तर है? वो कुछ भी नहीं बताते.

उनकी कार्यशाला कहाँ है, जिसमें उन्होंने इस तकनीक पर काम किया? वो कहते हैं, "टेक्नोलॉजी से जुड़े सारे काम पूरे हो चुके हैं, तीन साल से तो हम सरकार तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं". पर वो कार्यशाला की जानकारी नहीं देते.
मुर्तज़ा दावा करते हैं कि अपनी तकनीक के दम पर वो दूर से ही कार में कितना सामान है, क्या सामान है, इसका पता लगा सकते हैं.

वो दावा करते हैं कि एक साल पहले खाड़ी के एक देश के कुछ लोग उनके पास इस तकनीक को मांगने आए थे और उन्हें इस तकनीक के लिए एक लाख बीस हज़ार करोड़ रुपये ऑफ़र कर चुके हैं.

पर क्या कैमरा के आगे वो अपनी इस कथित तकनीक का प्रदर्शन कर सकते हैं? ऐसा नहीं कर पाने के उन्होंने कई तकनीकी कारण बताये और बाद में उन्होंने इससे इनकार कर दिया.

उन्होंने कहा, "25 अक्तूबर 2018 को मैं स्टांप पेपर पर इस तकनीक को प्रधानमंत्री के नाम ट्रांसफ़र कर चुका हूँ. इसलिए गोपनीयता के कारण वो पहले इस तकनीक को भारत सरकार को दिखाना चाहेंगे."

क्या वो तकनीक हस्तान्तरण के दस्तावेज़ दिखा सकते हैं? उन्होंने इससे भी इनकार ही किया।"""

'न कागज़, न पैसा'

बातचीत के अंत में मुर्तज़ा अली कहते हैं कि ये अब सरकार पर है कि वो कब उन्हें मिलने के लिए बुलाए, वो पैसे पीएम को दें और डोनेशन का पैसा सैनिकों के परिवारों तक पहुँचे.

प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े उनके दावों की पड़ताल करने के लिए हमने पीएमओ में बात की.

प्रधानमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "मुर्तज़ा अली ने डोनेशन की पेशकश का मेल पीएमओ को भेजा था. उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने का वक़्त मांगा था और वो चाहते थे कि डोनेशन का चेक वो ख़ुद पीएम को दें."

उन्होंने बताया, "दफ़्तर के प्रोटोकॉल का ख़याल रखते हुए पीएम के अपॉइंटमेंट सेक्शन ने उन्हें फंड सेक्शन से बात करने को कह दिया था जहाँ वो बिना शर्त वाला डोनेशन दे सकते हैं."

फंड विभाग (पीएमओ) के उप-सचिव अग्नि कुमार दास ने बीबीसी को बताया कि "फ़ोन पर मुर्तज़ा ने 110 करोड़ रुपये दान करने की बात की थी. वो अपनी किसी रिसर्च के कागज़ भी हमें देना चाहते थे. हमने उनसे कहा था कि वो पीएमओ में आकर अपने कागज़ जमा करा दें. लेकिन न कागज़ आए, न ही कोई पैसा."

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